विमर्श/अभिव्यक्ति संस्कृति

भारत के विश्वगुरु का क्या है मतलब ?

संजय तिवारी असली विकास है मनुष्य की चेतना का विकास। भारत इसी विकास का आदिकाल से विश्वगुरु है। लेकिन चेतन व्यक्ति भोगवादी नहीं होता। जो समाज जितना चेतन होता है उतना ही त्यागवादी होता है। विकसित चेतना के लिए भोग विलास क्षण भंगुर है। भोग विलास करने के लिए मनुष्य की चेतना का पतन जरूरी […]

संस्कृति

मथुरा वृन्दावन ने खेली खून की होली

मथुरा वृन्दावन ने खेली खून की होली संजय तिवारी बात 1757 की है। अहमद शाह अब्दाली एक बार दिल्ली को तहस नहस करने आया था। उसने अपनी एक टुकड़ी मथुरा वृन्दावन की तरफ भी भेज दिया जिसका नेतृत्व सरदार खान कर रहा था। मथुरा में करीब दस हजार जाट सैनिकों ने अपने राजकुमार जवाहर सिंह […]