देश दुनिया विमर्श/अभिव्यक्ति

जब लव जिहाद हैं ही नहीं तो कानून बनने से परेशानी क्यों!

संजय तिवारी सोशल मीडिया पर कोई मुसलमान नहीं मिलेगा जो ईमानदारी से इस बात को स्वीकार करे कि लव जिहाद जैसी कोई बात भी होती है। लेकिन कोई सरकार अगर इसे रोकने के लिए कानून बना दे तो सब कानून को समाप्त करने के लिए कोर्ट कचहरी की शरण लेते हैं। लाखों रूपया खर्च करके […]

खोज-खबर देश दुनिया

तालिबान के वैचारिकता का आधार भारत के एक मदरसे से

तालिबान के वैचारिक आधार का भारत कनेक्शन संजय तिवारी तालिबान ने युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दिया है। बिना किसी खास विरोध के तालिबान के लड़ाके काबुल में प्रविष्ट हो गये और राष्ट्रपति सहित पूरा अफगान प्रशासन काबुल से भाग खड़ा हुआ। करीब 20 साल बाद अब काबुल पर तालिबान का दोबारा कब्जा हो गया […]

दिल्ली दरबार देश दुनिया

वैक्सीन के साथ मास्क और सावधानी है जरूरी

नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर देश में आ चुकी है। इसमें संक्रमण की गति एक बार फिर तेज देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन और कोरोना उपयुक्त व्यवहार का पालन करके ही आप कोरोना को हरा सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि हम निर्धारित दूरी का पालन करें। जब […]

दिल्ली दरबार देश दुनिया बात-विचार विमर्श/अभिव्यक्ति

भारत में सरकार का मतलब ब्रिटिश उपनिवेश का वो ढांचा जो जनता को लूटने के लिए गढा गया

संजय तिवारी एक बार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कह रहे थे, मोदी को विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ता। मोदी कहते हैं विरोधी अपना काम कर रहे हैं और मैं अपना। अगर विरोधियों की बात पर ध्यान दूंगा तो कभी काम नहीं कर पाऊंगा। जो नेता ये बात बता रहे थे किसी समय मोदी […]

दिल्ली दरबार देश दुनिया बात-विचार राष्ट्रवाद विमर्श/अभिव्यक्ति

मान्यताओं के मकड़जाल में

संजय तिवारी “कुरान की छब्बीस आयतें आतंकवाद का कारण हैं।” ये कहना है वसीम रिजवी का। इसे लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल किया है। लेकिन जनहित याचिका दाखिल होने के बाद जिस तरह से मुसलमान बौखलायें हैं उसे देखकर लगता है कि कहीं कोई सच्चा मुसलमान रिजवी की हत्या न कर […]

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड खोज-खबर देश दुनिया व्यक्तिनामा

निब्बू मुशहर : सतत विकास के सच्चे संदेशवाहक हैं

संजय​ तिवारी ये निब्बू मुशहर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक घुमंतू जाति। अगर हमारे समाज में आसपास कोई माटी का लाल है तो वो यही लोग हैं। माटी पानी और पेड़ की जितनी समझ इन्हें होती है, शायद किसी कृषि स्नातक को भी नहीं होती होगी। लेकिन इनकी अपनी जीवन शैली है। जैसे पानी […]