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लव जिहाद की यह कहानी आप भी जानिए

संजय तिवारी
मुन्नीलाल कन्नौजिया की बेटी उमा देवी उरई में ग्राम सेसा की रहनेवाली है। मई 2018 में उसका संपर्क उरई के ही बजरिया मोहल्ला से आरिफ खान से हो गया। दोनों में प्रेम हो गया और आरिफ ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। जब उमा ने आरिफ से शादी करने का फैसला किया तो घर में विरोध हुआ लेकिन हर विरोध को दरकिवार करते हुए उमा अपनी मोहब्बत के साथ चांद तारों की सैर पर निकल गयी। उसने 2018 में ही आरिफ से कोर्ट मैरिज कर लिया। क्योंकि मुसलमान किसी गैर मुस्लिम से शादी नहीं कर सकता इसलिए उमा से विवाह के पहले उसने उसने इस्लाम कबूल करवा दिया।
इधर मुन्नीलाल ने घर से बेटी के भाग जाने पर पुलिस में केस किया तो आरिफ के साथ अदालत पहुंचकर उमा ने स्वयं बयान दिया कि उसने जो कुछ किया है जानबूझकर और पूरे होश में किया है। उसने बयान दर्ज करवाया कि अब वह अपने शौहर के साथ गुजरात में रहती है। मुन्नीलाल भी क्या करते? जब बेटी ही बाप की शत्रु बनकर खड़ी है तो कौन सी लड़ाई लड़ते? वो भी थक हार कर चुप बैठ गये। पुलिस ने भी मुकदमें में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। बात खत्म।
लेकिन बात अभी खत्म कहां हुई थी? उधर दो कुछ महीने गुजरात में गुजारने के बाद आरिफ ने उमा को वापस उरई भेज दिया अपनी बहन के पास। उरई में कुछ दिन उमा उसके बहन के साथ रही फिर उसकी बहन ने उसे अलग से कमरा दिलवा दिया। वो भी शादीशुदा थी। कब तक दूसरों का बोझ ढोती। उमा अलग से कमरा लेकर रहने लगी और नौकरी भी कर लिया।
इसी बीच उमा को पता चला कि आरिफ ने गुजरात में किसी और लड़की से निकाह कर लिया है। उमा जिस मोहब्बत की डोर को पकड़े चांद तारे तोडने निकली थी, वो मोहब्बत तीन साल में ही किसी और का हो गया। स्वाभाविक है इसके बाद दोनों में झगड़ा शुरु हुआ। झगड़ा इतना बढा कि एक दिन उरई पहुंचकर आरिफ ने उमा की अच्छे से मरम्मत करने के बाद आग के हवाले कर दिया। उमा अधजली अवस्था में इस समय झांसी में इलाज करवा रही है।
अब तीन साल में पहली बार उसे याद आया है कि वह सेसा के मुन्नीलाल कन्नौजिया की बेटी है। इसलिए जब पुलिस ने उसका बयान लिया तो उसने अपने आप को मुन्नीलाल की बेटी बताया। जिस बाप को लात मारकर, सरेआम बेईज्जत करके उमा आरिफ के साथ भाग गयी थी, और कभी लौटकर उनकी तरफ मुंह भी नहीं किया। अब उसी उमा ने पुलिस को बताया है कि वह मुन्नीलाल कन्नौजिया की बेटी है और आरिफ ने उसे जलाकर मारने की कोशिश किया है।
उमा को मालूम होना चाहिए था कि आरिफ के लिए चार शादियां जायज हैं और इसमें कोर्ट भी कुछ नहीं कर सकता। आरिफ ने जो किया बिल्कुल अपने दीन के मुताबिक किया। उस पर तो कोई सवाल हो ही नहीं सकता। सवाल तो उमा पर है कि जहन्नुम की आग में कूदते समय क्या उसने सोचा नहीं था कि इसमें शरीर ही नहीं मन भी जलता है?
#लवजिहाद

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